भारतीय मौसम विभाग आज दीर्घ अवधि मानसून का अनुमान जारी करेगा। इसमें बुधवार से शुरू हो रहे दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश का पूर्वानुमान बताया जाएगा। इस बार पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव कोरोना को देखते हुए पूर्वानुमान ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए जारी करेंगे। पिछले साल 96% बारिश होने की संभावना जताई थी। मानसूनी बारिश का वितरण अच्छा रहने और इसके खरीफ मौसम की फसलों के लिए लाभकारी होने की बात कही थी।
हर साल अप्रैल और जून में विभाग पूरे देश में मानसून की स्थिति का अनुमान जारी करता है। हालांकि इसमें क्षेत्रीय स्तर पर होने बारिश का पूर्वानुमान शामिल नहीं होता। वर्ष 1951 से 2000 तक मानसून के दौरान देश में औसत बारिश 890 मिलीमीटर है।
अभी देश में प्री मानसून का मौसम
फिलहाल देश में प्री-मानसून का दूसरा महीने यानि अप्रैल समय चल रहा है। मौसम पूर्वानुमान पोर्टल स्काइमेट के मुताबिक इस समय तक आते-आते देश के कई इलाकों में लू का प्रकोप शुरू होने की संभावना रहती है। मौजूदा समय में देश के मध्य भागों में भीषण गर्मी का असर दिखना शुरू हो चुका है। गुजरात के कई इलाके लू की चपेट में आ गए हैं। अब मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी इसका असर नजर आ सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में भारी बारिश की आशंका है।
1 जून तक दस्तक दे सकता है दक्षिण पश्चिम मानसून
एक्यूवेदर के मुताबिक, में इस साल दक्षिण पश्चिम मानसून 1 जून तक केरल से दस्तक दे सकता है। पिछले साल यह 29 मई को केरल के तट से टकराया था। फरवरी में जारी रिपोर्ट में इस साल सामान्य मानसून रहने का अनुमान जताया गया था। स्काइमेट के मुताबिक, जनवरी में मौजूदा स्थिति को देखते हुए मानसून सामान्य रहने के संकेत मिले थे। इसलिए सामान्य मानसून का अनुमान जताया गया था। लेकिन मौजूदा परस्थितियों में काफी परिवर्तन देखने को मिला है।