प्रदेश में हो रहे राजनीतिक बदलाव के साथ ही भोपाल में दो नगर निगम गठन की संभावनाएं समाप्त हो गईं हैं। महापौर का चुनाव भी अब पार्षदों के बीच से नहीं होगा बल्कि पहले की तरह जनता सीधे महापौर का चुनाव करेगी। भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट भी वापस होने के आसार हैं। नई सरकार के गठन के बाद नगरीय आवास एवं विकास विभाग दो निगम गठन की अधिसूचना वापस ले सकता है।
महापौर चुनाव की प्रक्रिया में बदलाव के लिए नगरपालिक निगम अधिनियम में संशोधन करना होगा। दिसंबर 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद पुरानी कोलार नगरपालिका को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद जिला कांग्रेस ने दो नगर निगम के गठन का प्रस्ताव दिया था।
इस प्रस्ताव पर दावे- आपत्ति की प्रक्रिया पूरी हो गई है। एक तरफ दो निगम गठन की फाइल 5 माह से राज्यपाल के पास विचाराधीन है और दूसरी तरफ भाजपा के जिला महामंत्री सत्यार्थ प्रकाश अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। भाजपा ने इसको लेकर आंदोलन भी किया था और निगम परिषद ने भी इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। एेसे में सरकार बदलने पर दो नगर निगम गठन की प्रक्रिया रुकना तय है।
ड्राफ्ट वापस होगा या फिर संशोधन होंगे
दस साल के इंतजार के बाद भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी हुआ था। भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि ड्राफ्ट तैयार करने से पहले उनसे सलाह लेने की केवल औपचारिकता निभाई गई। कांग्रेस नेताओं के इशारे पर ही लैंडयूज तय किए गए। एेसे में ड्राफ्ट को वापस लेकर नए सिरे से तैयार किया जाना चाहिए। संभावना यह भी है कि दावे, आपत्ति और सुझावों का समय बढ़ाकर प्लान में बदलाव किए जा सकते हैं।